Home Blog

Hello world!

1

Welcome to WordPress. This is your first post. Edit or delete it, then start writing!

Bitcoin currency in hindi

0

बिटकॉइन एक तरह की एक डिजिटल मुद्रा (digital currency) और स्वतन्त्र मुद्रा है | इस पर किसी भी संस्था या देश का अधिकार नहीं है| इसका मालिक, भौतिक (physical) रूप से चीजों की खरीदारी नहीं कर सकता बल्कि बिटकॉइन का उपयोग ऑनलाइन ही क्या जा सकता है| इसका अधिग्रह होने पर अधिकारी सिर्फ ऑनलाइन शॉपिंग या हस्तांतरण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं| इसका उत्पादन स्वतन्त्र रूप से कंप्यूटर प्रोसेसिंग प्रणाली “Mining” के द्वारा किया जाता है| Miners विशेष प्रकार के हार्डवेयर का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के लेन देन को पूरा करते है और नेटवर्क को सुरक्षित करते है जिनके बदले में नए बिटकॉइन बनते है जो miners को मिलते है|

जिस तरह रुपए, डॉलर और यूरो खरीदे जाते हैं, उसी तरह बिटकॉइन की भी खरीद होती है। ऑनलाइन भुगतान के अलावा इसको पारम्परिक मुद्राओं में भी बदला जाता है। बिटकॉइन की खरीद-बिक्री के लिए एक्सचेंज भी हैं, लेकिन उसका कोई औपचारिक रूप नहीं है। जबकि गोल्‍डमैन साक्‍स और न्‍यूयॉर्क स्‍टॉक एक्‍सचेंज तक ने इसे बेहद तेज और कुशल तकनीक कहकर इसकी तारीफ की है। इसलिए दुनियाभर के बिजनेसमैन और कई कंपनियां फाइनैंशियल ट्रांजेक्‍शन के लिए इसका इस्‍तेमाल खूब कर रहे हैं। इसे किसने विकसित किया था इसके बारे में कोई भी ठोस सबूत नही है लेकिन छदम रूप से इसके संस्थापक का नाम सोतशी नाकामोतो माना जाता हैl

शेयर बाजार में इस्तेमाल किए जाने वाले 23 सबसे महत्वपूर्ण शब्द

(#बिटकॉइन के संस्थापक सोतशी नाकामोतो)

1- इसकी शुरुआत 3 जनवरी 2009 को हुई थी।

2- यह विश्व का प्रथम पूर्णतया खुला भुगतान तंत्र है।

3- इस समय दुनिया भर में 1 करोड से अधिक बिटकाइन हैं, जिनका मूल्य 55 हज़ार करोड रुपए है।

#बिटकॉइन का इस्तेमाल कौन कर रहा है ?

दुनिया का पहला ओपन पेमेंट नेटवर्क बिटकॉइन चर्चा में है। क्‍योंकि, फाइनैंशियल ट्रांजैक्‍शन के लिए यह सबसे तेज और कुशल मानी जा रही है। इसलिए बिटकॉइन को वर्चुअल करंसी भी कहा जाता है।

दरअसल बिटकॉइन एक नई टेक्नोलॉजी है जि‍सका इस्तेमाल ग्लोबल पेमेंट के लिए किया जा सकता है। हजारों कंपनियों, लोगों और गैर लाभकारी संगठन ने ग्लोबल बिटकॉइन सिस्टम को अपनाया है। हालांकि इस मुद्रा का व्यापार, निर्माण और नियंत्रण अन्य बिटकॉइन उपयोगकर्ताओं द्वारा किया जाता है l

#कोई केंद्रीय संस्था नहीं है

बिटकॉइन को किसी संस्था द्वारा नियंत्रित नही किया जाता है जिसका अर्थ है कि इसके ऊपर सरकार या बैंक का कोई अधिकार नही हैl इनका उपयोग या खरीदारी किसी के द्वारा भी की जा सकती हैl चूंकि इनके व्यापार को रोका नही जा सकता है इसलिए कोई भी बैंक या प्राधिकरण आपको इंटरनेट द्वारा किसी और को अपने बिटकॉन्स भेजने से रोक नही सकता है। लेकिन इसमें एक दुविधा यह भी है कि यदि आपके साथ कोई धोखा होता है तो आप किसी के पास भी इसके बारे में शिकायत दर्ज नही करा सकते हैं l

#इसका मूल्य कितना होता है?

दुनिया भर में Bitcoins के वितरण की सीमा मात्र 210,00000 है यानि कि कुल मिलकर पूरे विश्व में 210,00000 ही बनाए जाएँगे उसके बाद इसका उत्पादन बंद हो जाएगा| कुछ ऐसी भी मूलभूत प्रक्रियाएं हैं जो इसे जटिल बनाती हैं और अधिकृत व्यक्ति को इसे समझने के लिए तकनीकी जानकारी होना आवश्यक हो जाता हैl

जैसा कि पहले ही बताया गया है कि यह एक छदम मुद्रा है जिसने 2013 में बहुत प्रसिद्धि पाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उठा पटक मचा दी थी l दरअसल तीन साल पहले वजूद में आई बिटकॉइन दुनिया की सबसे महंगी करंसी बन गई है। इस समय एक बिटकॉइन को ऑनलाइन या बाजार में तकरीबन 790676 रुपये में बेचा जा सकता है। इसका मूल्य इसकी मांग और पूर्ती के बीच के समन्वय पर पड़ता है या खरीदने वाला जितना मूल्य देने को तैयार हो जाये

इसकी कीमत हर देश में अलग अलग होती हैl चूँकि इसका चलन विश्व बाज़ार में है, इसलिए इसकी कीमत हर देश में इसकी मांग के अनुसार होती है| इस समय एक बिटकॉइन का खरीदी मूल्य 790676 रूपए है वहीँ अमेरिका में एक बिटकॉइन की कीमत $604 है आज बिटकॉइन का चलन विश्व बाज़ार में बहुत तेज़ी पर हैl लेकिन इस बाजार में अस्थिरता बहुत अधिक होती हैl

#बिटकॉइन की बिक्री और खरीद कैसे की जाती है?

डिजिटल करंसी बिटकॉइन का उपयोग करने वाले बिजनेसमैन की संख्‍या लगभग 30 लाख बताई जा रही है और जूपिटर रिसर्च के मुताबिक यह संख्‍या 2019 तक 50 लाख तक पहुंच सकती है।

बिटकॉइन को हासिल करने के लिए आपको बहुत मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है आप खनन (mining ) जैसे विभिन्न तरीकों के माध्यम से डिजिटल मुद्रा कमा सकते हैं ( बिटकॉइन की संरचना करने के लिए एक विशेष सॉफ़्टवेयर की मदद ली जा सकती है जिसे बिटकॉइन बनाने वाला सॉफ्टवेयर कहा जाता (Bitcoin Miner) है l यह सॉफ्टवेयर बिटकॉइन नेटवर्क में आपके लिए एक जगह को सुरक्षित कर लेगा!

कम्प्यूटर नेटवर्कों के जरिए इस मुद्रा से बिना किसी माध्यम के ट्रांजेक्‍शन किया जा सकता है। वहीं, इस डिजिटल करंसी को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। बिटकॉइन को क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है। जबकि जटिल कम्‍प्‍यूटर एल्गोरिथम्स और कम्‍प्‍यूटर पावर से इस मुद्रा का निर्माण किया जाता है जिसे माइनिंग कहते हैं।

बिटकॉइन को किसी को अपनी सेवा देकर भी सैलरी के रूप में कमाया जा सकता है l यदि आप चाहें तो इसे वास्तविक मुद्रा जैसे डॉलर और यूरो से भी बदल सकते हैं l

साधारण मुद्रा की तरह बिटकॉइन को भी आसानी से खर्च किया जा सकता है l इसका इस्तेमाल आप सामान खरीदने के लिए, कुछ गैर-सरकारी संगठनों को दान करने या उन्हें किसी और को भेजने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं l कुछ ऐसी विभिन्न साइटें जैसे विकिलीक्स, पी 2 पी फाउंडेशन, वर्डप्रेस.कॉम और बिटकॉइन.ट्रेवल हैं जो बिटकॉइन को स्वीकार करते हैं l अभी हाल ही में दुनिया में आतंक मचाने वाले रैन्समवेयर वायरस को बनाने वाले हैकरों ने फिरौती के तौर पर bitcoin मुद्रा की ही मांग की हैl

भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक लोगों को इस मुद्रा में निवेश करने से रोक रहा है लेकिन फिर भी लोग इसमें बड़ी संख्या में निवेश कर रहे हैं लेकिन भारत सरकार इस bitcoin मुद्रा के दोषों को देखते हुए इसके वाणिज्यिक प्रसार को रोकने के लिए जल्दी ही कानून बनाने की बात सोच रही है l ज्ञातब्य है कि भारतीय रिज़र्व बैंक पहले से ही इस मुद्रा में किसी भी प्रकार के निवेश को गैर कानूनी बताता आया है और उसने लोगों को इस मुद्रा से दूर रहने की सलाह भी दी है क्योंकि यह मुद्रा, बैंकिंग नियमन अधिनियम,1934 के नियमों का पालन भी नही करती है

क्रायोजेनिक इंजन क्या है?

0

क्रायोजेनिक तकनीक को ‘निम्नतापकी’ कहा जाता है, जिसका ताप -0 डिग्री से -150 डिग्री सेल्सियस होता है।
‘क्रायो’ यूनानी शब्द ‘क्रायोस’ से बना है, जिसका अर्थ ‘बर्फ जैसा ठण्डा’ है।

क्रायोजेनिक तकनीक का मुख्य प्रयोग रॉकेटों में किया जाता है, जहाँ ईधनों को क्रायोजेनिक तकनीक से तरल अवस्था में प्राप्त कर लिया जाता है।

इस तकनीक में द्रव हाइड्रोजन एवं द्रव ऑक्सीजन का प्रयोग किया जाता है।

किसी राकेट को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने के दौरान उसका ईंधन भी साथ में ले जाना पड़ता है। ऐसे में सबसे हल्का ईंधन तरल हाईड्रोजन और तरल ऑक्सीजन है और उसे जलाने पर सबसे अधिक ऊर्जा मिलती है। मुख्य बात यह है कि राकेट कितनी तेजी से जा रहा है और राकेट के साथ जितना कम वजन होगा वो उतनी अधिक दूर तक जा सकेगा।

क्रायोजेनिक इंजन शून्य से बहुत नीचे यानी क्रायोजेनिक तापमान पर काम करते हैं। ऋण 238 डिग्री फॉरेनहाइट (-238’F) को क्रायोजेनिक तापमान कहा जाता है। इस तापमान पर क्रायोजेनिक इंजन का ईंधन ऑक्सीजन और हाइड्रोजन गैसें तरल यानी द्रव बन जाती हैं। द्रव ऑक्सीजन और द्रव हाइड्रोजन को क्रायोजेनिक इंजन में जलाया जाता है। द्रव ईंधन जलने से इतनी ऊर्जा पैदा होती है जिससे क्रायोजेनिक इंजन को 4.4 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार मिल जाती है।

क्रायोजेनिक इंजन की तकनीक का विकास द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ। तब सबसे ज्यादा ऊर्जा पैदा करने वाले और आसानी से मुहैया ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर सबसे बेहतर पाया गया। मुश्किल ये थी इंजन में ये गैस के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो सकती थीं, क्योंकि तब उन्हें रखने के लिए इंजन बड़ा बनाना पड़ता, जबकि रॉकेट उड़ाने के लिए इसका छोटा होना जरूरी शर्त है।

भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान में प्रयुक्त होने वाली द्रव्य ईंधन चालित इंजन में ईंधन बहुत कम तापमान पर भरा जाता है, इसलिए ऐसे इंजन तुषारजनिक रॉकेट इंजन (क्रायोजेनिक रॉकेट इंजिन) कहलाते हैं। इस तरह के रॉकेट इंजन में अत्यधिक ठंडी और द्रवीकृत गैसों को ईंधन और ऑक्सीकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस इंजन में हाइड्रोजन और ईंधन क्रमश: ईंधन और ऑक्सीकारक का कार्य करते हैं। ठोस ईंधन की अपेक्षा यह कई गुना शक्तिशाली सिद्ध होते हैं और रॉकेट को बूस्ट देते हैं। विशेषकर लंबी दूरी और भारी रॉकेटों के लिए यह तकनीक आवश्यक होती है।

क्रायोजेनिक इंजन के प्रणोद में तापमान बहुत ऊंचा (2000 डिग्री सेल्सियस से अधिक) होता है। अत: ऐसे में सर्वाधिक प्राथमिक कार्य अत्यंत विपरीत तापमानों पर इंजन व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता अर्जित करना होता है।

क्रायोजेनिक इंजनों में -253डिग्री सेल्सियस से लेकर 2000 डिग्री सेल्सियस तक का उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए प्रणोद(थ्रस्ट) चैंबरों, टर्बाइनों और ईंधन के सिलेंडरों के लिए कुछ विशेष प्रकार की मिश्र-धातु की आवश्यकता होती है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बहुत कम तापमान को आसानी से झेल सकने वाली मिश्रधातु विकसित कर ली है।

अन्य द्रव्य प्रणोदकों की तुलना में क्रायोजेनिक द्रव्य प्रणोदकों का प्रयोग कठिन होता है। इसकी मुख्य कठिनाई यह है कि ये बहुत जल्दी वाष्प बन जाते हैं। इन्हें अन्य द्रव प्रणोदकों की तरह रॉकेट खंडों में नहीं भरा जा सकता।

क्रायोजेनिक इंजन के टरबाइन और पंप जो ईंधन और ऑक्सीकारक दोनों को दहन कक्ष में पहुंचाते हैं, को भी खास किस्म के मिश्रधातु से बनाया जाता है। द्रव हाइड्रोजन और द्रव ऑक्सीजन को दहन कक्ष तक पहुंचाने में जरा सी भी गलती होने पर कई करोड़ रुपए की लागत से बना जीएसएलवी रॉकेट रास्ते में जल सकता है।

इसके अलावा दहन के पूर्व गैसों (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) को सही अनुपात में मिश्रित करना, सही समय पर दहन प्रारंभ करना, उनके दबावों को नियंत्रित करना, पूरे तंत्र को गर्म होने से रोकना आदि।

इस तकनीक का महत्व इस तथ्य में निहित है कि दो हज़ार किलो वज़नी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए क्रायोजेनिक इंजन की सख़्त ज़रूरत पड़ती है। इसकी वजह ये है कि इसी इंजन से वो ताक़त मिलती है, जिसके बूते किसी उपग्रह को 36,000 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया जाता है। इस सफल प्रक्षेपण के साथ ही ये कहा जा सकता है कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अब हर तरह की उपलब्धि हासिल कर ली है।

केंद्रीय बजट

0

बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के ‘बूजट’ (bowgette) से हुई बताई जाती है। ‘बूजट’ का अर्थ होता है ‘चमड़े की थैली’ इस आप बैग समझ सकते हैं। बजट के वर्तमान स्वरूप का यदि इतिहास में सबसे पहले उल्लेख देखा जाए तो यह सबसे पहले 1773 में मिलता है। भारतीय बजट संसद में राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित तिथि पर प्रस्तुत किया जाता है।

वित्त मंत्री का बजट भाषण सामान्यतः दो भागों में होता है। भाग ए देश के सामान्य आर्थिक सर्वेक्षण से संबंधित है जबकि भाग बी कर संबंधी प्रस्तावों से संबंधित है। वित्त मंत्री हर साल फरवरी के महीने में देश का आम बजट पेश करते हैं। पहले आम बजट फरवरी के अंतिम दिन यानी 28 या 29 फरवरी को आता था। पिछले साल से आम बजट एक फरवरी को पेश करने की परंपरा शुरु हुई।

पहला भारतीय बजट:

भारत में बजट पेश करने की परंपरा इस्ट-इंडिया कंपनी ने शुरू की। कंपनी ने 7 अप्रैल 1860 को बजट पेश किया था। आजादी से पहले अंग्रेजों के शासनकाल में पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने 1860 में पेश किया था। विल्सन ने द इकोनोमिस्ट और स्टैन्डर्ड चार्टर्ड बैंक की स्थापना की।

देश के संविधान में “बजट” शब्द नहीं:

देश के संविधान में ‘बजट’ शब्द का जिक्र ही नहीं है। संविधान में कहा गया है कि सरकार हर साल संसद के समक्ष अपना ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ (एनुअल फाइनेंसियल स्टेटमेंट) पेश करेगी। इसके ही लोकप्रिय भाषा में बजट कहा जाता है।

बजट से जुड़े प्रमुख तथ्य:

स्वतंत्रता के बाद देश का पहला बजट पहले वित्त मंत्री आर० के० षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया। इसमें 15 अगस्त 1947 से लेकर 31 मार्च 1948 के दौरान साढ़े सात महीनो को शामिल किया गया। इस बजट में किसी तरह के टैक्स के प्रस्तावों को शामिल नहीं किया गया था।

आरके षणमुखम चेट्टी ने 1948-49 के बजट में पहली बार अंतिरम शब्द का प्रयोग किया तब से लघु अवधि के बजट के लिए इस शब्द का इस्तेमाल शुरु हुआ।

भारतीय गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जान मथाई ने पेश किया था इस बजट में योजना आयोग की स्थापना का वर्णन किया था।

भारत की नई गठित संसद के समक्ष पहला बजट सीडी देशमुख ने पेश किया था। वह आरबीआई के पहले भारतीय गवर्नर थे और 1950 से 1956 तक वित्त मंत्री रहे।

1958-59 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने बजट पेश किया उस समय वित्त मंत्रालय उनके पास था ऐसा करने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने इंदिरा गांधी ने भी प्रधानमंत्री रहते बजट पेश किया अब तक बजट पेश करने वाली और वित्त मंत्री का पद संभालने वाली वे देश की इकलौती महिला है।

मोरारजी देसाई ने अब तक सर्वाधिक दस बार बजट पेश किया है छह बार वित्त मंत्री और चार बार उप प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होने ऐसा किया अपने जन्मदिन पर भी बजट पेश करने वाले भी वह एकमात्र मंत्री है।

देसाई के बाद प्रणब मुखर्जी, पी.चिदंबरम, यशवंत सिन्हा, वाई.बी.चौहान और सीडी देशमुख हैं, इन सभी ने सात-सात बार बजट पेश किया। मनमोहन सिंह और टीटी कृष्णमचारी ने 6-6 बार बजट पेश किया। आर.वेंकटरमन और एच.एम.पटेल ने तीन-तीन बजट पेश किए। सबसे कम बार जसवंत सिंह, वी.पी.सिंह, सी.सुब्रमण्यम, जॉन मथाई और आर.के.शानमुखम ने दो-दो बार बजट पेश किया।

बजट छपने के लिए भेजे जाने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है। इस रस्म के बाद बजट पेश होने तक वित्त मंत्रालय के संबधित अधिकारी किसी के संपर्क में नहीं रहते परिवार से दूर उन्हेँ वित्त मंत्रालय में ही रुकना पड़ता है।

1973-74 के बजट को ब्लैक बजट के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसमें 550 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया गया था। वी.पी.सिंह के सरकार से इस्तीफा देने के बाद 1987 में राजीव गांधी ने बजट पेश किया था। उन्होंने बजट में कॉर्पोरेट टैक्स को परिचित कराया।

अफ़स्पा क़ानून

0

अफ़स्पा क़ानून क्या है? इसके अंतर्गत डिस्टर्ब्ड एरिया कब घोषित किया जाता है? इस क़ानून को क्या शक्तियाँ प्राप्त है? वर्तमान में यह किन -किन राज्यों में प्रभावशील है?

– 60 साल पहले भारतीय संसद ने “अफस्पा” यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट 1958 को लागू किया, जो एक फौजी कानून है, जिसे “डिस्टर्ब” क्षेत्रों में लागू किया जाता है, यह कानून सुरक्षा बलों और सेना को कुछ विशेष अधिकार देता है।
– अफस्पा को 1 सितंबर 1958 को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सहित भारत के उत्तर-पूर्व में लागू किया गया था, इन राज्यों के समूह को सात बहनों के नाम से जाना जाता है। इसे भारतीय संघ से अलग पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा रोकने के लिए लागू किया गया था।
– बाद में पंजाब और चंडीगढ़ भी इस अधिनियम के दायरे में आए और 1997 में इस कानून को वहाँ पर समाप्त कर दिया गया। अफस्पा 1990 में, जम्मू और कश्मीर राज्य के लिए लागू किया गया था और तब से यह कार्यान्वित है।

=>एक क्षेत्र कब ‘डिस्टर्ब’ माना जाता है?
– विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा, क्षेत्रीय समूहों, जातियों, समुदायों के बीच मतभेद या विवादों के कारण राज्य या केंद्र सरकार एक क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित करती हैं।

=>अफस्पा की विशेषताएं
– राज्य या केंद्र सरकार के पास किसी भी भारतीय क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित करने का अधिकार है।
अधिनियम की धारा (3) के तहत, राज्य सरकार की राय का होना जरुरी है कि क्या एक क्षेत्र “डिस्टर्ब” है या नहीं। अगर ऐसा नही है तो राज्यपाल या केंद्र द्वारा इसे खारिज किया जा सकता है।
– अफस्पा अधिनियम की धारा (3) के तहत राज्य या संघीय राज्य के राज्यपाल को बजट की आधिकारिक सूचना जारी करने के लिए अधिकार देता है, जिसके बाद उसे केंद्र के नागरिकों की सहायता करने के लिए सशस्त्र बलों को भेजने का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
– (विशेष न्यायालय) अधिनियम 1976 के अनुसार, एक बार “डिस्टर्ब” क्षेत्र घोषित होने के बाद कम से कम 3 महीने तक वहाँ पर स्पेशल फोर्स की तैनाती रहती है।

=>अफस्पा के अधिकार
– अफस्पा के अनुसार, जो क्षेत्र “डिस्टर्ब” घोषित कर दिए जाते हैं वहाँ पर सशस्त्र बलों के एक अधिकारी को निम्नलिखित शक्तियाँ दी जाती हैं –

– चेतावनी के बाद, यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है और अशांति फैलाता है, तो सशस्त्र बल के विशेष अधिकारी द्वारा आरोपी की मृत्यु हो जाने तक अपने बल का प्रयोग किया जा सकता है।

– अफसर किसी आश्रय स्थल या ढांचे को तबाह कर सकता है जहाँ से हथियार बंद हमले का अंदेशा हो।
– सशस्त्र बल किसी भी असंदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं। गिरफ्तारी के दौरान उनके द्वारा किसी भी तरह की शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।
– अफसर परिवार के किसी व्यक्ति, सम्पत्ति, हथियार या गोला-बारूद को बरामद करने के लिए बिना वारंट के घर के अंदर जा कर तलाशी ले सकता है और इसके लिए जरूरी, बल का इस्तेमाल कर सकता है।
– एक वाहन को रोक कर या गैर-कानूनी ढंग से जहाज पर हथियार ले जाने पर उसकी तलाशी ली जा सकती है।
– यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उसको जल्द ही पड़ोसी पुलिस स्टेशन में अपनी गिरफ्तारी के कारण के साथ उपस्थित होना होता है कि उसको क्यों गिरफ्तार किया गया।
– सेना के अधिकारियों को उनके वैध कार्यों के लिए कानूनी प्रतिरक्षा दी जाती है।
– सेना के पास इस अधिनियम के तहत अभियोजन पक्ष, अनुकूल या अन्य कानूनी कार्यवाही के तहत अच्छे विश्वास में काम करने वाले लोगों की रक्षा करने की शक्ति है। इसमें केवल केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर सकती है।

=>अफस्पा के तहत राज्य
– मई 2015 में, त्रिपुरा में कानून व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण समीक्षा के बाद, 18 सालों के बाद अंत में अफस्पा को इस राज्य से हटा दिया गया था। निम्नलिखित राज्य अभी भी अफस्पा के दायरे में आते हैं –
१.असम
२.नगालैंड
३.मणिपुर (नगरपालिका क्षेत्र इंफाल को छोड़कर)
४.अरुणाचल प्रदेश (केवल तिरप, चंगलांग और लोंगडींग जिले और असम की सीमा के 20 किलोमीटर की बेल्ट तक)
५.मेघालय (असम की सीमा से 20 किलोमीटर की बेल्ट तक सीमित)
६. जम्मू और कश्मीर

परीक्षा के दृष्टिकोण से आर्थिक सर्वेक्षण 2018

0

#संसद में वित्त मंत्री जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया.

आर्थिक सर्वेक्षण में GDP वृद्धि दर वित्त वर्ष 19 में वित्त वर्ष 18 के 6.7% से बढ़कर 7-7.5% दर्ज की गई है.

*आर्थिक सर्वेक्षण में कच्चे तेल की औसत कीमतों में 12% की बढ़ोतरी हुई है.
*आयात में बढोत्तरी के कारण, 2017-18 में माल और सेवाओं का शुद्ध निर्यात घटने की संभावना है.
*निर्यात वृद्धि को बढ़ाने का सबसे बड़ा स्रोत है.

*GVA विकास वित्त वर्ष 2017 में 6.1% की तुलना में 6.6% है.
*जीएसटी डेटा अप्रत्यक्ष करदाताओं में 50% की वृद्धि दर्शाता है.
*इस वित्त वर्ष में वस्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 6.75% देखा गया.
*वित्त वर्ष 18 में औसत सीपीआई मुद्रास्फीति 3.7% देखी गई.
*सेवाओं का विकास 8.3%, उद्योग का 4.4% है.
*2017-18 में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र क्रमश: 2.1%, 4.4% और 8.3% की दर से बढ़ने की उम्मीद है.
*यह बताता है कि 2014-15 से 2017-18 की अवधि के लिए सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.3% की औसत है, जो कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है.
➡विमुद्रीकरण ने
➡वित्तीय बचत के भाग में
➡वृद्धि करने में सहायता की. जीडीपी में घरेलू बचत का अनुपात 2013 में 29.2 प्रतिशत पर पहुंच गया और 2007 में यह 38.3 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर था, 2016 में वापस 2 9% होने से पहले.
➡ग्रामीण भारत में स्वच्छता कवरेज 2014 में 39 प्रतिशत से बढ़कर जनवरी 2018 में 76 प्रतिशत हो गया. 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के शुभारंभ के साथ, ग्रामीण भारत में स्वच्छता कवरेज में काफी वृद्धि हुई. अब तक, पूरे भारत में 296 जिलों और 307,34 9 गांवों को ओपन डेफकेशन फ्री (ओडीएफ) घोषित किया गया है.
➡भारत धीरे-धीरे विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपने प्रदर्शन में सुधार कर रहा है. 2013 में, भारत वैज्ञानिक प्रकाशनों में दुनिया में 6 वें स्थान पर था. इसकी रैंकिंग लगातार बढ़ रही है. 200 9 से 2014 के बीच वार्षिक प्रकाशनों की वृद्धि लगभग 14% थी. इससे वैश्विक प्रकाशनों में भारत का हिस्सा 2009 में 3.1% से बढ़कर 2014 में बढ़कर 4.4% हो गया, जो कि स्कोपस डाटाबेस के अनुसार है.
➡दिसंबर 2016 के अंत से दिसंबर 2017 के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 14.1% की वृद्धि हुई. 2016-17 के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार 370 अरब अमरीकी डॉलर का अनुमान लगाया गया था. यह 2017-18 में 409.4 अरब डॉलर हो गया.
➡भारत के इतिहास में पहली बार, आर्थिक सर्वेक्षण में रा ज्यों के अंतर्राष्ट्रीय निर्यात पर आंकड़ों का उल्लेख किया गया है. इस तरह के डेटा निर्यात प्रदर्शन के बीच एक मजबूत सहसंबंध को इंगित करते हैं और राज्यों के जीवन स्तर को दर्शाता है. ऐसे राज्य जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात करते हैं और अन्य राज्यों के साथ व्यापार को समृद्ध बनाते है.

#Economic_Survey
=>आर्थिक सर्वे 2018 में क्या ख़ास है?

– अगले साल देश की आर्थिक ग्रोथ 6.75 फ़ीसदी के मुक़ाबले 7 से 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है.
– जीएसटी वसूली से सरकार की आय में बढ़ोतरी हो रही है. पिछले साल करीब 12 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली, जो कि अन्य टैक्स के मुकाबले काफ़ी बेहतर है.
– भारत में ऐसा पहली बार हुआ जब पांच राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना का भारत के कुल निर्यात में 70 प्रतिशत योगदान रहा.
– 2017-18 के दौरान महंगाई में कमी रही. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की महंगाई दर 3.3 थी, जो कि पिछले छह वित्तीय वर्षों में सबसे कम है.
– जीएसटी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
– सर्वे में सुझाव दिया गया है कि मध्‍यम अवधि में नौकरी, शिक्षा और कृषि पर खास तौर पर फोकस करने की ज़रूरत है.
– आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट है कि सरकार रोजगार, शिक्षा, खेती पर फोकस कर रही है और इसके लिए बजट में नई नीतियों की घोषणा हो सकती है.

– निजी निवेश को बढ़ाने और निर्यात पर ज़ोर देने के लिए भी सरकार कुछ एलान कर सकती है.

=>सर्वे के मुताबिक
– गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी और नोटबंदी के बाद करीब 18 लाख नए करदाता बढ़े हैं.
– वित्त वर्ष 2018-19 में कच्चे तेल की कीमतों में 12 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.
सर्विस सेक्टर की ग्रोथ में 8.3 फ़ीसदी रहने का अनुमान है.

=>कृषि ग्रोथ 2.1 फीसदी रहने की उम्मीद है.
– इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण बढ़ रहा है और ये ग्रोथ के लिए अच्छा संकेत है. सर्वे के मुताबिक ट्रैक्टर की बिक्री में अच्छी बढ़त देखने को मिली है.
इसके अलावा, जिस तरह से सर्विस सेक्टर में ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है, उससे लगता है कि सरकार नई नौकरियों के लिए बजट में विशेष घोषणाएं कर सकती है.

– वित्त मंत्रालय सालाना बजट से ठीक पहले हर साल संसद में देश के आर्थिक विकास का लेखा-जोखा पेश करता है. आर्थिक सर्वेक्षण में पिछले 12 महीने के दौरान अर्थव्यवस्था के अलग-अलग मोर्चों पर किए गए कार्यों का अवलोकन किया जाता है.
– संसद के दोनो सदनों के समक्ष पेश किए जाने वाले इस दस्तावेज़ में सरकार की प्रमुख विकास योजनाओं की उपलब्धियों, आर्थिक नीतियों और अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के विभिन्न पहलुओं का जिक्र किया जाता है.

Hello world!

1

Welcome to WordPress. This is your first post. Edit or delete it, then start writing!

राज्यो से सम्बन्धित लोकनृत्य

0
भारतीय राज्यों लोक नृत्य
छत्तीसगढ़ पंथी और राउत नाचा
गुजरात टिपानी, पदधर, रास और गरबा
हरयाणा धमाल, दाफ, फग, घूमर, झुमार, लूर
हिमाचल प्रदेश किन्नौरी नाती, न्मेंन
झारखंड कर्मा
आंध्र प्रदेश कोलट्टम, धीमसा, कुचीपुड़ी और वीरानाट्यम
मेघालय शाद सुक मंसैम, बेधिनख्खम और लाहू
अरुणाचल प्रदेश बर्दो छम
पंजाब भांगड़ा, झूमर, कार्ती, किक्की, सममी और जिंदुआ
बिहार बाइडिया, जिहजियन पाइका और काजारी
मिजोरम चेर नृत्य
नगालैंड चांग लो या सुआ लुआ
ओडिशा  चौ, गती पाप, नक्कनी, ओडिसी, ढाप और दलखै, बागा नाच
जम्मू और कश्मीर दम्हल, भण्ड पाथेर, बच नागमा और वावेगी-नचुन
राजस्थान घूमर, कालबेलिया गेयर, तेरा ताली
सिक्किम सिंह चौम
कर्नाटक यक्षग्ना, बयालता, डालु कुनथा, वीरगाज़ नृत्य
केरल मोहिनीट्टम, कथकली और पदैनी
मध्य प्रदेश तर्तली, चार्मुला, जवाड़ा, गौर मारिया और ग्रिडा
उत्तर प्रदेश चारकुला, कथक, कर्म, दादरा
असम अली ऐ लैगांग, बिहू, जुमार और बागुरुम्बा,
तमिलनाडु भरत नाट्यम, पाम्पू अटम और ओयलिट्टम
तेलंगाना पेरीनी थंडवम, लाम्बाडी, दप्पु, पगती और वाशम
त्रिपुरा Hojagiri
पश्चिम बंगाल जुहिरा, कालिकपट्टीडी, नन्सी, अल्काप, डोमनी
उत्तराखंड बरदा नाती, बोटिया, कैनचीरी, झोरा, रोलाला
गोवा Dekhnni, Fugdi, Corridinho, दशहरा
महाराष्ट्र पाविरी-नच, लावणी, डांगी और कोली
मणिपुर थांग टा और ढोल चोलम